Transliteration: (Wa tadhakoona wa laa tabkoon)
"और तुम हँसते हो और रोते नहीं [71]?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़ुरआन सुनकर रोना अल्लाह के नेक और मुक़र्रब बंदों का तरीक़ा है जो उसके जलाल व जमाल से मुतास्सिर होते हैं; जबकि मज़ाक़ उड़ाना और हँसना मुनकिरीन और काफ़िरों की बदबख़्ती की अलामत है।
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