कुरान - 53:60 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
وَتَضۡحَكُونَ وَلَا تَبۡكُونَ

Transliteration: (Wa tadhakoona wa laa tabkoon)

और तुम हँसते हो और रोते नहीं [71]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 60

"और तुम हँसते हो और रोते नहीं [71]?"


[71] क़ुरआन सुनकर रोना अहले-मुहब्बत का शिआर है

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़ुरआन सुनकर रोना अल्लाह के नेक और मुक़र्रब बंदों का तरीक़ा है जो उसके जलाल व जमाल से मुतास्सिर होते हैं; जबकि मज़ाक़ उड़ाना और हँसना मुनकिरीन और काफ़िरों की बदबख़्ती की अलामत है।

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