कुरान - 4:101 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

101
وَإِذَا ضَرَبۡتُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَلَيۡسَ عَلَيۡكُمۡ جُنَاحٌ أَن تَقۡصُرُواْ مِنَ ٱلصَّلَوٰةِ إِنۡ خِفۡتُمۡ أَن يَفۡتِنَكُمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْۚ إِنَّ ٱلۡكَٰفِرِينَ كَانُواْ لَكُمۡ عَدُوّٗا مُّبِينٗا

Transliteration: (Wa izaa darabtum fil ardi falaisa 'alaikum junaahun an taqsuroo minas Salaati in khiftum ai yaftinakumul lazeena kafarooo; innal kaafireena kaanoo lakum aduwwam mubeenaa)

और जब तुम ज़मीन में सफ़र करो, तो तुम पर इसमें कोई गुनाह नहीं कि नमाज़ में क़स्र (कमी) कर लो, अगर तुम्हें यह ख़ौफ़ हो कि काफ़िर लोग तुम्हें तकलीफ़ पहुंचाएंगे; बेशक काफ़िर तुम्हारे खुले दुश्मन हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 101 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 101

✅ नमाज़े क़स्र की रुख़्सत

सफ़र की हालत में चार रकअत वाली फ़र्ज़ नमाज़ों को दो रकअत (क़स्र) करके पढ़ना अल्लाह की तरफ़ से बंदों के लिए ख़ास रुख़्सत और रहमत है।

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