कुरान - 4:99 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

99
فَأُوْلَـٰٓئِكَ عَسَى ٱللَّهُ أَن يَعۡفُوَ عَنۡهُمۡۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَفُوًّا غَفُورٗا

Transliteration: (Fa ulaaa'ika 'asal laahu ai ya'fuwa 'anhum; wa kaanal laahu 'Afuwwan Ghafooraa)

"ऐसे लोगों से उम्मीद है कि अल्लाह उन्हें माफ़ कर देगा, और अल्लाह तो हमेशा दरगुज़र करने वाला, बड़ा बख़्शने वाला है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 99 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 99 की तफ़्सीर

 

  • यहाँ "ऐसे लोग" से मुराद पिछली आयत (98) में बताए गए वास्तविक मज़लूम और बेबस लोग हैं—
    • जो हिजरत पर क़ुदरत नहीं रखते
    • जिनके पास न साधन हैं, न रास्ता, और न मददगार
  • अल्लाह तआला इनके बारे में फ़रमा रहा है कि उनसे माफ़ी की उम्मीद है—
    • यानी, ये अल्लाह की रहमत से माफ़ कर दिए जाएंगे, क्योंकि उनकी मजबूरी हक़ीक़ी है, बनावटी नहीं।
  • आयत के आखिर में अल्लाह के दो सफ़ात (गुण) बयान हुए:
    1. अफ़ुव्व – जो गुनाह को यूँ मिटा देता है मानो हुआ ही न हो
    2. ग़फ़ूर – जो बार-बार माफ़ करने वाला है

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now