कुरान - 4:107 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

107
وَلَا تُجَٰدِلۡ عَنِ ٱلَّذِينَ يَخۡتَانُونَ أَنفُسَهُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ مَن كَانَ خَوَّانًا أَثِيمٗا

Transliteration: (Wa laa tujaadil 'anil lazeena yakhtaanoona anfusahum; innal laaha laa yuhibbuman kaana khawwaanan aseemaa)

और उन लोगों की तरफ़ से न झगड़िए जो अपनी जानों से ख़ियानत करते हैं; बेशक अल्लाह किसी ख़ियानत करने वाले, बड़े गुनाहगार को पसंद नहीं करता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 107 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 107

✅ ख़ियानत करने वालों की हिमायत की मुमानअत

तूअमा बिन उबैरिक़ जैसे मुनाफ़िक़ों के वाक़िए के पसमंज़र में यह हुक्म आया कि जो लोग ख़ियानत और चोरी करके बेगुनाहों पर इल्ज़ाम लगाते हैं, उनकी वकालत और हिमायत हरगिज़ न की जाए।

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