कुरान - 4:105 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
إِنَّآ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ بِٱلۡحَقِّ لِتَحۡكُمَ بَيۡنَ ٱلنَّاسِ بِمَآ أَرَىٰكَ ٱللَّهُۚ وَلَا تَكُن لِّلۡخَآئِنِينَ خَصِيمٗا

Transliteration: (Innaaa anzalnaaa ilaikal Kitaaba bilhaqqi litahkuma bainan naasi bimaaa araakal laah; wa laa takul lilkhaaa'ineena khaseemaa)

बेशक हमने आपकी तरफ़ यह किताब हक़ के साथ नाज़िल की है ताकि आप लोगों के दरम्यान उस (इल्म) के मुताबिक़ फ़ैसला फ़रमाएं जो अल्लाह ने आपको दिखाया है; और ख़ियानत करने वालों के तरफ़दार (वकील) न बनिए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 105

✅ अदल व इन्साफ़ का हुक्म

हुज़ूर (सल्ल.) को क़ुरआन और वही-ए-इलाही की रौशनी में हक़ व इन्साफ़ से फ़ैसले करने का हुक्म दिया गया और ख़ाइन व मुजरिम लोगों की हिमायत करने से मना फ़रमाया गया।

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