कुरान - 4:104 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

104
وَلَا تَهِنُواْ فِي ٱبۡتِغَآءِ ٱلۡقَوۡمِۖ إِن تَكُونُواْ تَأۡلَمُونَ فَإِنَّهُمۡ يَأۡلَمُونَ كَمَا تَأۡلَمُونَۖ وَتَرۡجُونَ مِنَ ٱللَّهِ مَا لَا يَرۡجُونَۗ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا

Transliteration: (Wa laa tahinoo fibtighaaa'il qawmi in takoonoo ta'lamoona fa innahum ya'lamoona kamaa ta'lamoona wa tarjoona minal laahi maa laa yarjoon; wa kaanal laahu 'Aleeman Hakeemaa)

और (काफ़िर) क़ौम का पीछा करने में कमज़ोरी न दिखाओ; अगर तुम तकलीफ़ उठाते हो तो वे भी तकलीफ़ उठाते हैं जैसे तुम उठाते हो, और तुम अल्लाह से उस चीज़ की उम्मीद रखते हो जिसकी वे उम्मीद नहीं रखते; और अल्लाह ख़ूब जानने वाला, हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 104 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 104

✅ दुश्मनों के मुक़ाबले में अज़्म व हिम्मत

मुजाहिदीन को हौसला दिया गया कि अगर जंग में ज़ख़्म और मशक़्क़त तुम्हें पहुंचती है तो काफ़िरों को भी पहुंचती है, मगर तुम्हारे पास जन्नत और रज़ाए इलाही की उम्मीद है जो उनके पास नहीं।

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