कुरान - 4:106 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

106
وَٱسۡتَغۡفِرِ ٱللَّهَۖ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ غَفُورٗا رَّحِيمٗا

Transliteration: (Wastaghfiril laaha innal laaha kaana Ghafoorar Raheema)

और अल्लाह से मग़फ़िरत तलब कीजिए; बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 106 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 106

✅ इस्तिग़फ़ार की अहमियत

हर मुआमले में अल्लाह की बारगाह में इस्तिग़फ़ार और उसकी रहमत की तलब इंसान को गुनाहों और भूल-चूक से पाक रखती है।

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