Transliteration: (La'anahul laah; wa qaala la attakhizanna min 'ibaadika naseebam mafroodaa)
इस आयत से तीन अहम बातें सामने आती हैं:
(1) तक़य्या (धोखेबाज़ धार्मिकता) इतनी घिनौनी चीज़ है कि शैतान ने भी इसका सहारा नहीं लिया। उसके पास ज्ञान, चालाकी और धोखे की तमाम शक्तियाँ थीं, फिर भी उसने झूठा परहेज़गार बनने की कोशिश नहीं की, बल्कि खुल्लमखुल्ला बग़ावत का एलान किया।
(2) शैतान ने अल्लाह के नबियों और वलियों का दर्जा कबूल किया। उसने उन्हें "तेरे बन्दे" कहकर पुकारा, जो इस बात का इज़हार है कि वह जानता है कि ये लोग अल्लाह के क़रीबी हैं।
(3) शैतान यह भी जानता है कि अल्लाह किन्हें अपने फ़ज़ल से महफ़ूज़ रखता है, इसलिए उसने साफ़-साफ़ उन बंदों को अलग किया जिन पर उसका बस नहीं चलता।
इसलिए जो लोग नबियों और वलियों को गुनहगार समझते हैं, असल में वे शैतान से भी बदतर हैं, क्योंकि शैतान ने भी उनकी पाकीज़गी और अल्लाह से रिश्ते को कबूल किया है।
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