कुरान - 4:118 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

118
لَّعَنَهُ ٱللَّهُۘ وَقَالَ لَأَتَّخِذَنَّ مِنۡ عِبَادِكَ نَصِيبٗا مَّفۡرُوضٗا

Transliteration: (La'anahul laah; wa qaala la attakhizanna min 'ibaadika naseebam mafroodaa)

यह वह है जिस पर अल्लाह ने लानत की, और उसने कहा कि मैं तेरे बन्दों में से एक निश्चित हिस्सा अवश्य ले लूंगा [360]. (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 118 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 118 की तफ़्सीर

 

✅ [360] शैतान की कसम और अल्लाह की लानत

इस आयत से तीन अहम बातें सामने आती हैं:
(1) तक़य्या (धोखेबाज़ धार्मिकता) इतनी घिनौनी चीज़ है कि शैतान ने भी इसका सहारा नहीं लिया। उसके पास ज्ञान, चालाकी और धोखे की तमाम शक्तियाँ थीं, फिर भी उसने झूठा परहेज़गार बनने की कोशिश नहीं की, बल्कि खुल्लमखुल्ला बग़ावत का एलान किया।

(2) शैतान ने अल्लाह के नबियों और वलियों का दर्जा कबूल किया। उसने उन्हें "तेरे बन्दे" कहकर पुकारा, जो इस बात का इज़हार है कि वह जानता है कि ये लोग अल्लाह के क़रीबी हैं।

(3) शैतान यह भी जानता है कि अल्लाह किन्हें अपने फ़ज़ल से महफ़ूज़ रखता है, इसलिए उसने साफ़-साफ़ उन बंदों को अलग किया जिन पर उसका बस नहीं चलता।

इसलिए जो लोग नबियों और वलियों को गुनहगार समझते हैं, असल में वे शैतान से भी बदतर हैं, क्योंकि शैतान ने भी उनकी पाकीज़गी और अल्लाह से रिश्ते को कबूल किया है।

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