Transliteration: (Iny yad'oona min dooniheee illaaa inaasanw wa iny yad'oona illaa Shaitaanam mareedaa)
मुसरिक लोग यह मानते थे कि फरिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। इसी झूठे विश्वास के आधार पर उन्होंने उनकी पूजा शुरू की। उन्होंने औरतों की शक्ल में बुत बनाए और उन्हें जेवरों से सजाया। यह सब बिलकुल जिहालत और गुमराही पर आधारित था। उन्होंने अल्लाह की इबादत छोड़कर बनावटी औरतों जैसी मखलूक़ों को माबूद बना लिया।
जो शख्स रसूलुल्लाह ﷺ के रास्ते को छोड़कर किसी और की पैरवी करता है, वह असल में शैतान का पीछा करता है। क्योंकि हर गुमराही और बगावत की जड़ शैतान है। इस तरह जो लोग गलत राहों को अपनाते हैं, वे चाहे जानबूझकर या अनजाने में, शैतान ही की बंदगी कर रहे होते हैं।
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