कुरान - 4:117 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

117
إِن يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦٓ إِلَّآ إِنَٰثٗا وَإِن يَدۡعُونَ إِلَّا شَيۡطَٰنٗا مَّرِيدٗا

Transliteration: (Iny yad'oona min dooniheee illaaa inaasanw wa iny yad'oona illaa Shaitaanam mareedaa)

वे लोग अल्लाह को नहीं पूजते, बल्कि कुछ औरतों को पूजते हैं [358], और वे केवल एक सिरफिरे शैतान की पूजा करते हैं [359]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 117 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन्निसा – आयत 117 की तफ़्सीर

 

✅ [358] झूठी माबूदाओं की पूजा

मुसरिक लोग यह मानते थे कि फरिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। इसी झूठे विश्वास के आधार पर उन्होंने उनकी पूजा शुरू की। उन्होंने औरतों की शक्ल में बुत बनाए और उन्हें जेवरों से सजाया। यह सब बिलकुल जिहालत और गुमराही पर आधारित था। उन्होंने अल्लाह की इबादत छोड़कर बनावटी औरतों जैसी मखलूक़ों को माबूद बना लिया।

✅ [359] शैतान की पैरवी करने वाले

जो शख्स रसूलुल्लाह ﷺ के रास्ते को छोड़कर किसी और की पैरवी करता है, वह असल में शैतान का पीछा करता है। क्योंकि हर गुमराही और बगावत की जड़ शैतान है। इस तरह जो लोग गलत राहों को अपनाते हैं, वे चाहे जानबूझकर या अनजाने में, शैतान ही की बंदगी कर रहे होते हैं।

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