कुरान - 4:121 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

121
أُوْلَـٰٓئِكَ مَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُ وَلَا يَجِدُونَ عَنۡهَا مَحِيصٗا

Transliteration: (Ulaaa'ika ma'waahum Jahannamu wa laa yajidoona 'anhaa maheesaa)

जहन्नम उनका ठिकाना होगा, और वे उससे बच नहीं सकेंगे [366]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 121 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 121 की तफ़्सीर

 

✅ [366] काफ़िरों के लिए जहन्नम की यक़ीनी और हमेशा की सज़ा

यहाँ "बच नहीं सकेंगे" का मतलब है कि जब काफ़िरों को जहन्नम में डाला जाएगा, तो वे ना तो जिस्मानी तौर पर वहाँ से निकल सकेंगे, और ना ही अल्लाह की मग़फ़िरत के ज़रिए।

मगर यह हुक्म मोमिनों पर लागू नहीं होता। अगर मोमिन अपने गुनाहों की सज़ा के बाद अल्लाह की रहमत से माफ़ कर दिए जाएँ, तो उन्हें जहन्नम से निकाल लिया जाएगा।

इसलिए हमेशा की सज़ा सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जो कुफ़्र की हालत में मरते हैं, बिना तौबा और ईमान के।

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