कुरान - 4:123 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

123
لَّيۡسَ بِأَمَانِيِّكُمۡ وَلَآ أَمَانِيِّ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِۗ مَن يَعۡمَلۡ سُوٓءٗا يُجۡزَ بِهِۦ وَلَا يَجِدۡ لَهُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيّٗا وَلَا نَصِيرٗا

Transliteration: (Laisa bi amaaniyyikum wa laaa amaaniyyi Ahlil Kitaab; mai ya'mal sooo'ai yujza bihee wa laa yajid lahoo min doonil laahi waliyanw wa laa naseeraa)

यह मामला न तो तुम्हारी तमन्नाओं से चलेगा, और न ही अहले किताब की ख्वाहिशों से [369]। जो कोई बुराई करेगा, उसे उसी का बदला मिलेगा [370], और वह अल्लाह के सिवा न कोई सरपरस्त पाएगा न मददगार [371]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 123 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 123 की तफ़्सीर

 

✅ [369] निजात के बारे में झूठी उम्मीदों का रद्द

इस आयत का नुज़ूल उन झूठी उम्मीदों को खत्म करने के लिए हुआ, जो मुख़्तलिफ़ गिरोह रखते थे।
यहूद कहते थे कि हमें बस चालीस दिन की सज़ा मिलेगी, क्योंकि हमने बछड़े की पूजा सिर्फ़ इतने ही दिनों की थी।
नसरानी यह समझते थे कि उन्हें सज़ा नहीं मिलेगी, क्योंकि ईसा (अलैहि०) ने उनके गुनाहों का कफ़्फ़ारा बनकर जान दे दी।
मुशरिक़ यह गुमान रखते थे कि उनके बुत उन्हें जहन्नम से बचा लेंगे।
यह आयत इन सब बेबुनियाद ख़्वाहिशों को पूरी तरह ग़लत ठहराती है।

✅ [370] हर बुरे अमल की पूरी सज़ा

ऐ यहूद, नसरानी और मुशरिक़ों! तुम्हारा यह ख़्याल कि गुनाह तुम्हें नुक़सान नहीं देंगे, बिलकुल ग़लत है।
जो कोई भी गुनाह करेगा, उसे उसका पूरा बदला मिलेगा, चाहे वह किसी भी मज़हब या गिरोह से ताल्लुक़ रखता हो।
इससे यह भी साबित होता है कि ग़ैर-मुस्लिमों पर भी आख़िरत में शरीअत लागू होगी — यानी उन्हें कुफ़्र के साथ-साथ उनके गुनाहों पर भी सज़ा मिलेगी।

✅ [371] काफ़िरों के लिए कोई मददगार नहीं होगा

इससे यह हक़ीक़त सामने आती है कि आख़िरत में मददगारों और शफ़ाअत करने वालों से महरूम होना, काफ़िरों के लिए सज़ा का हिस्सा है।
इसके मुकाबले में मोमिनों को अल्लाह की रहमत और फज़ल से, कई मददगार और शफ़ाअत करने वाले नसीब होंगे, जो उनकी मदद करेंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now