Transliteration: (Muzabzabeena baina zaalika laaa ilaa haaa' ulaaa'i wa laaa ilaa haaa'ulaaa'; wa mai yudli lillaahu falan tajida lahoo sabeela)
इस आयत में मुनाफ़िक़ों की दोमुंही और डगमगाई हुई हालत को बयान किया गया है।
इससे यह हिदायत मिलती है कि:
इस आयत का आख़िरी हिस्सा बहुत सख़्त चेतावनी है:
अगर कोई शख़्स बार-बार हक़ को ठुकराए,
फरेब और मुनाफ़िक़त में डूबा रहे,
तो अल्लाह उसे उसके हाल पर छोड़ देता है,
और फिर कोई नबी, वली या आलिम भी उसे राह नहीं दिखा सकता।
हिदायत सिर्फ़ अल्लाह का इनआम है, जो सच्चे तालिबों को मिलता है।
हम सबको चाहिए कि हमेशा दुआ करें:
"ऐ अल्लाह! हमें हिदायत पर क़ायम रख और मुनाफ़िक़त से बचा"।
आमीन।
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