कुरान - 4:145 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

145
إِنَّ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ فِي ٱلدَّرۡكِ ٱلۡأَسۡفَلِ مِنَ ٱلنَّارِ وَلَن تَجِدَ لَهُمۡ نَصِيرًا

Transliteration: (Innal munaafiqeena fiddarkil asfali minan Naari wa lan tajida lahum naseeraa)

बेशक मुनाफ़िक़ लोग दोज़ख़ के सबसे निचले तबक़े (दरक-ए-असफ़ल) में होंगे, और आप उनके लिए हरगिज़ कोई मददगार नहीं पाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 145 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 145

✅ मुनाफ़िक़ीन का दोज़ख़ के सबसे निचले गढ़े में होना

मुनाफ़िक़ों का जुर्म काफ़िरों से भी ज़्यादा संगीन है क्योंकि वे इस्लाम का लबादा ओढ़कर अंदर से धोखा देते थे; इसलिए उन्हें जहन्नम के सबसे निचले और शदीद अज़ाब वाले तबक़े में डाला जाएगा।

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