कुरान - 4:167 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

167
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ قَدۡ ضَلُّواْ ضَلَٰلَۢا بَعِيدًا

Transliteration: (Innal lazeena kafaroo wa saddoo 'an sabeelil laahi qad dalloo dalaalam ba'eedaa)

जिन्होंने कुफ़्र किया और दूसरों को अल्लाह के रास्ते से रोका, वे बेशक बहुत दूर भटक गए हैं [475]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 167 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 167 की तफ़्सीर

 

✅ [475] केवल कुफ़्र नहीं, बल्कि दूसरों को भी गुमराह करना

इस आयत में ऐसे लोगों की निंदा की गई है जो न सिर्फ़ खुद इंकार करते हैं,
बल्कि दूसरों को भी ईमान लाने से रोकते हैं।

  • यह गुमराही का सबसे ख़राब रूप है — खुद भी न माने और दूसरों को भी हक़ की राह से हटाए।
  • ऐसे लोग सिर्फ़ गुमराह नहीं, बल्कि "बहुत दूर भटक गए" हैं,
    यानी उनकी वापसी की उम्मीद बेहद कम हो जाती है।

📌 सीख:
जैसे एक सच्चा मुसलमान जो खुद अमल करता है और दूसरों को भी भलाई की दावत देता है, ऊँचे दर्जे वाला होता है,
उसी तरह एक काफ़िर जो खुद भी इंकार करे और दूसरों को भी भटकाए, ज़्यादा सख्त सज़ा का हक़दार होता है।

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