कुरान - 4:168 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

168
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَظَلَمُواْ لَمۡ يَكُنِ ٱللَّهُ لِيَغۡفِرَ لَهُمۡ وَلَا لِيَهۡدِيَهُمۡ طَرِيقًا

Transliteration: (Innal lazeenakafaroo wa zalamoo lam yakunillaahu liyaghfira lahum wa laa liyahdiyahum tareeqaa)

निःसंदेह जिन्होंने कुफ़्र किया और हद से आगे बढ़े [476], अल्लाह न तो उन्हें कभी माफ़ करेगा [477] और न उन्हें सीधी राह दिखाएगा [478]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 168 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 168 की तफ़्सीर

 

✅ [476] ज़्यादती का मतलब – अल्लाह की किताब में बदलाव

“हद से आगे बढ़े” से मुराद वे पापी उलमा हैं जो जानबूझकर गुमराही फैलाते हैं, विशेषकर बनी इसराईल के कुछ लोग:

  • उन्होंने तौरात के हुक्मों में तहरीफ (बदलाव) किया,
  • लोगों को ईमान लाने से रोका,
  • और आख़िरत का इन्कार किया।

📖 एक हदीस में आता है कि ऐसे काफ़िर की दुनिया की ज़िंदगी ऐसे होती है जैसे वह किसी मूर्ति की पूजा में डूबा हुआ हो — यानी सिर्फ़ इनकार ही नहीं, बल्कि खुला विद्रोह।

✅ [477] माफ़ी से महरूमी

जो लोग मौत तक कुफ़्र पर अड़े रहते हैं,
उनके लिए अल्लाह की माफ़ी मुमकिन नहीं होती।

  • तौबा की दरवाज़ा ज़िंदगी में खुला होता है,
    लेकिन मरते दम तक कुफ़्र करने वाले के लिए कोई माफ़ी नहीं।

✅ [478] हिदायत से महरूमी

अल्लाह उन्हें सीधी राह नहीं दिखाएगा, यानी:

  • वे नेकियों की तरफ़ माइल नहीं होंगे,
  • जन्नत की राह उनके लिए बंद कर दी जाएगी,
  • मानो उनके लिए हिदायत कभी मुमकिन ही नहीं थी।

📌 यह अल्लाह की सज़ा का वो पहलू है जो सबसे ज़्यादा डराने वाला है —
कि इंसान इस कदर गुमराह हो जाए कि हिदायत उसकी किस्मत से निकाल दी जाए।

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