Transliteration: (Innal lazeenakafaroo wa zalamoo lam yakunillaahu liyaghfira lahum wa laa liyahdiyahum tareeqaa)
“हद से आगे बढ़े” से मुराद वे पापी उलमा हैं जो जानबूझकर गुमराही फैलाते हैं, विशेषकर बनी इसराईल के कुछ लोग:
📖 एक हदीस में आता है कि ऐसे काफ़िर की दुनिया की ज़िंदगी ऐसे होती है जैसे वह किसी मूर्ति की पूजा में डूबा हुआ हो — यानी सिर्फ़ इनकार ही नहीं, बल्कि खुला विद्रोह।
जो लोग मौत तक कुफ़्र पर अड़े रहते हैं,
उनके लिए अल्लाह की माफ़ी मुमकिन नहीं होती।
अल्लाह उन्हें सीधी राह नहीं दिखाएगा, यानी:
📌 यह अल्लाह की सज़ा का वो पहलू है जो सबसे ज़्यादा डराने वाला है —
कि इंसान इस कदर गुमराह हो जाए कि हिदायत उसकी किस्मत से निकाल दी जाए।
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