Transliteration: (Wa in khiftum shiqaaqa baini himaa fab'asoo haka mam min ahlihee wa hakamam min ahlihaa; iny-yureedaaa islaah ai-yuwaffiqil laahu bainahumaa; innal laaha kaana 'Aleeman Khabeeraa)
इस आयत से यह शिक्षा मिलती है कि:
बड़े गुनाहों से बचना छोटे गुनाहों के लिए तौबा के समान होता है। यह अल्लाह की रहमत को दर्शाता है कि वह केवल बड़े गुनाहों से बचने पर भी छोटे गुनाहों को माफ़ कर देता है, भले ही उनके लिए अलग से तौबा न की गई हो — बशर्ते इंसान बड़े गुनाहों से सावधान रहे।
बड़े गुनाहों में शामिल हैं:
ये वो गुनाह हैं जो या तो दुनिया में सज़ा के हक़दार होते हैं, या फिर आख़िरत में विशेष सज़ा का कारण बनते हैं — जैसा कि क़ुरआन की स्पष्ट आयतों से साबित होता है।
इसके अलावा:
अगर कोई छोटा गुनाह बार-बार और जानबूझकर किया जाए, तो वह बड़े गुनाह में तब्दील हो सकता है। जैसा कि अल्लाह फ़रमाता है:
"और वे लोग जो अपने किए पर जानबूझकर डटे नहीं रहते।" (सूरह आल-इमरान: आयत 135)
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