Transliteration: (Alam tara ilal lazeena ootoo naseebam minal Kitaabi yashtaroonad dalaalata wa yureedoona an tadillus sabeel)
"किताब का एक हिस्सा दिया गया" — इससे मुराद है: यहूदियों में से वे लोग जो तौरात के कुछ हिस्सों पर तो ईमान लाते थे, लेकिन बाक़ी हिस्सों, ख़ासकर हज़रत मुहम्मद ﷺ की नबूवत, को झुठलाते थे। वे हज़रत मूसा (अलैहि सलाम) को मानते थे, मगर अंतिम रसूल ﷺ का इंकार करते थे, जबकि उनकी किताबों में उनका ज़िक्र साफ़ मौजूद था। इस तरह का चयनात्मक ईमान, रूहानी बेईमानी की मिसाल है।
"रास्ता भटकाना" यानी: वे जानबूझकर मुसलमानों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वे खुद ईमान से इंकार कर चुके हैं, और चाहते हैं कि दूसरे भी उसी गुमराही में फँस जाएँ। इससे हमें सबक मिलता है: गुमराह इंसान, कभी-कभी शैतान से भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है, क्योंकि शैतान तो सच्चे परहेज़गारों से मायूस हो चुका है, मगर ये लोग हर वक़्त धोखा देने की साज़िश करते रहते हैं। उनका हसद, तकब्बुर और धोखे की आदत उन्हें शैतान से भी ज़्यादा ख़तरनाक बना देती है।
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