कुरान - 4:56 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِنَا سَوۡفَ نُصۡلِيهِمۡ نَارٗا كُلَّمَا نَضِجَتۡ جُلُودُهُم بَدَّلۡنَٰهُمۡ جُلُودًا غَيۡرَهَا لِيَذُوقُواْ ٱلۡعَذَابَۗ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَزِيزًا حَكِيمٗا

Transliteration: (Innal lazeena kafaroo bi Aayaatinaa sawfa nusleehim Naaran kullamaa nadijat julooduhum baddalnaahum juloodan ghairahaa liyazooqul 'azaab; innallaaha kaana 'Azeezan Hakeemaa)

जो लोग हमारी आयतों को झुटलाते हैं [195], हम जल्द ही उन्हें आग में डाल देंगे। जब भी उनकी खालें जलकर गल जाएंगी, तो हम उन्हें नई खालों से बदल देंगे [196], ताकि वे सज़ा का स्वाद चखते रहें। बेशक, अल्लाह बहुत ज़बरदस्त और हिकमत वाला है [197]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 56 की तफ़्सीर

 

✅ [195] नबी ﷺ का इनकार क़ुरआन का इनकार है

इससे हमें यह समझ आता है कि रसूल ﷺ का इनकार करना क़ुरआन की सभी आयतों का इनकार करने के बराबर है, और इस इनकार का अंजाम जहन्नम की आग है।

✅ [196] खालों का जलना – एक अनोखी और इंसाफ़ वाली सज़ा

इससे दो अहम बातें निकलती हैं:
हालाँकि जहन्नम की आग काफ़िरों के पूरे जिस्म को घेरेगी, लेकिन सिर्फ उनकी खालें बार-बार जलाई जाएंगी। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "वह आग जो दिलों तक पहुँचेगी" (सूरा हमज़ा, 104:7)।
इतनी शिद्दत वाली आग में भी उन्हें मौत नहीं आएगी। हर बार जब उनकी खाल जल जाएगी, नई खाल उगा दी जाएगी, जैसे फोड़े या छाले के बाद नई खाल बनती है।
यह सज़ा सिर्फ काफ़िरों के लिए ख़ास है; मुसलमानों की सज़ा इसकी तरह न होगी।

✅ [197] अल्लाह की क़ुदरत और हिकमत से भरी सज़ा

इसका मतलब है कि अल्लाह तआला हर तरह की सज़ा देने पर पूरी क़ुदरत रखता है, और हर सज़ा में उसकी हिकमत भी शामिल होती है।
यह अल्लाह की क़ुदरत का करिश्मा है कि इतने सख़्त और हमेशा के अजाब के बावजूद काफ़िरों को मौत नहीं आएगी।
एक आसान मिसाल: लोहे और इस्पात को ज़मीन में डालो तो वह गल जाता है, लेकिन बीज डालो तो वह उगता है। यही है अल्लाह की कामिल क़ुदरत और हिकमत।

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