Transliteration: (Alam tara annal laaha yusabbihu lahoo man fissamaawaati wal ardi wat tairu saaaffaatim kullun qad 'alima Salaatahoo wa tasbeehah; wallaahu 'aleemum bimaa yaf'aloon)
"क्या आपने नहीं देखा [112] कि जो कोई भी आसमानों और ज़मीन में है [113] अल्लाह की तस्बीह करता है, और पर फैलाए हुए परिंदे भी [114]? हर एक अपनी नमाज़ और अपनी तस्बीह जानता है [115]; और अल्लाह उनके आमाल को ख़ूब जानता है [116]।"
आसमान और ज़मीन की हर मख़्लूक़—फ़रिश्ते, इंसान, जिन्नात, जमादात, नबातात और हवा में पर फैलाकर उड़ने वाले परिंदे—सब अपने-अपने अंदाज़ में अपने ख़ालिक़ की पाकी और तौहीद बयान करते हैं।
अल्लाह तआला ने हर परिंदे, जानवर और ज़र्रे को उसकी फ़ितरत के मुताबिक़ इबादत और तस्बीह का तरीक़ा सिखा दिया है। इंसान ज़बान से और दीगर मख़्लूक़ात अपने हाल व अमल से अल्लाह की बड़ाई बयान करती हैं।
अल्लाह तआला हर मख़्लूक़ के आमाल, तस्बीहात और हरकतों से बाख़बर है और क़ियामत के दिन हर एक के मुताबिक़ जज़ा व सज़ा फ़रमाएगा।
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