कुरान - 24:40 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
أَوۡ كَظُلُمَٰتٖ فِي بَحۡرٖ لُّجِّيّٖ يَغۡشَىٰهُ مَوۡجٞ مِّن فَوۡقِهِۦ مَوۡجٞ مِّن فَوۡقِهِۦ سَحَابٞۚ ظُلُمَٰتُۢ بَعۡضُهَا فَوۡقَ بَعۡضٍ إِذَآ أَخۡرَجَ يَدَهُۥ لَمۡ يَكَدۡ يَرَىٰهَاۗ وَمَن لَّمۡ يَجۡعَلِ ٱللَّهُ لَهُۥ نُورٗا فَمَا لَهُۥ مِن نُّورٍ

Transliteration: (Aw kazulumaatin fee bahril lujjiyyiny yaghshaahu mawjun min fawqihee mawjun min fawqihee sahaab; zulumatun ba'duhaa fawqa ba'din izaaa akhraja yadahoo lam yakad yaraahaa wa man lam yaj'alil laahu lahoo nooran famaa lahoo min noor (section 5))

या फिर (उनके आमाल की मिसाल ऐसी है) जैसे एक गहरे अथाह समंदर की तारीकियां (अंधेरे), जिसे एक मौज ने ढांप रखा हो, उसके ऊपर एक और मौज हो, उसके ऊपर घने बादल हों; अंधेरे पर अंधेरा (तारीकियों की परतें) हों! जब वह अपना हाथ निकाले तो उसे भी देखने के क़रीब न हो [110]; और जिसे अल्लाह ही नूर न बख़्शे, उसके लिए फिर कहीं कोई नूर नहीं [111]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 40

"या जैसे गहरे समंदर की तारीकियां, मौज पर मौज और ऊपर बादल; अंधेरे पर अंधेरा! जब हाथ निकाले तो उसे भी न देख सके [110]। और जिसे अल्लाह ही नूर न दे, उसके लिए कहीं कोई नूर नहीं [111]!"

[110] कुफ़्र की तारीकियों की परतें

यह काफ़िर के दिल की दूसरी मिसाल है। अथाह समंदर की गहराई, ऊपर से मौजों का थपेड़ा, फिर दूसरी मौज और आसमान पर घने काले बादल—यह शिर्क, जहालत, बदअक़ीदगी और हठधर्मी के भयानक अंधेरे हैं जिसमें काफ़िर को अपना हाथ भी नज़र नहीं आता। वह मुकम्मल तौर पर गुमराही में डूबा हुआ है।

[111] नूर-ए-इलाही के बग़ैर कोई नजात नहीं

जिस शख़्स को अल्लाह तआला ईमान और मारिफ़त का नूर अता न फ़रमाए, पूरी कायनात में कोई ताक़त उसे हिदायत की रौशनी नहीं दे सकती। हिदायत सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह के फ़ज़्ल से मिलती है।

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