Transliteration: (Aw kazulumaatin fee bahril lujjiyyiny yaghshaahu mawjun min fawqihee mawjun min fawqihee sahaab; zulumatun ba'duhaa fawqa ba'din izaaa akhraja yadahoo lam yakad yaraahaa wa man lam yaj'alil laahu lahoo nooran famaa lahoo min noor (section 5))
"या जैसे गहरे समंदर की तारीकियां, मौज पर मौज और ऊपर बादल; अंधेरे पर अंधेरा! जब हाथ निकाले तो उसे भी न देख सके [110]। और जिसे अल्लाह ही नूर न दे, उसके लिए कहीं कोई नूर नहीं [111]!"
यह काफ़िर के दिल की दूसरी मिसाल है। अथाह समंदर की गहराई, ऊपर से मौजों का थपेड़ा, फिर दूसरी मौज और आसमान पर घने काले बादल—यह शिर्क, जहालत, बदअक़ीदगी और हठधर्मी के भयानक अंधेरे हैं जिसमें काफ़िर को अपना हाथ भी नज़र नहीं आता। वह मुकम्मल तौर पर गुमराही में डूबा हुआ है।
जिस शख़्स को अल्लाह तआला ईमान और मारिफ़त का नूर अता न फ़रमाए, पूरी कायनात में कोई ताक़त उसे हिदायत की रौशनी नहीं दे सकती। हिदायत सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह के फ़ज़्ल से मिलती है।
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