कुरान - 24:38 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
لِيَجۡزِيَهُمُ ٱللَّهُ أَحۡسَنَ مَا عَمِلُواْ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضۡلِهِۦۗ وَٱللَّهُ يَرۡزُقُ مَن يَشَآءُ بِغَيۡرِ حِسَابٖ

Transliteration: (Liyajziyahumul laahu ahsana maa 'amiloo wa yazeedahum min fadlih; wal laahu yarzuqu mai yashaaa'u bighairi hisaab)

ताकि अल्लाह उन्हें उनके बेहतरीन आमाल का बदला अता फ़रमाए [104] और अपने फ़ज़्ल से उन्हें और ज़्यादा दे [105]; और अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब रोज़ी अता फ़रमाता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 38

"ताकि अल्लाह उन्हें उनके बेहतरीन आमाल का बदला अता फ़रमाए [104] और अपने फ़ज़्ल से उन्हें और ज़्यादा दे [105]; और अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब रोज़ी अता फ़रमाता है।"

[104] बेहतरीन आमाल का आला तरीन अज्र

अल्लाह तआला अपने नेक बन्दों के मामूली आमाल को भी अपने करम से आला तरीन दर्जे पर क़बूल फ़रमाकर बेहतरीन जज़ा अता फ़रमाएगा।

[105] फ़ज़्ल-ए-इलाही से मज़ीद इनामात (बे-हिसाब अता)

सवाब आमाल के बदले में तो मिलेगा ही, लेकिन अल्लाह अपने ख़ास फ़ज़्ल से उन्हें वह कुछ भी अता फ़रमाएगा जिसका उन्होंने कभी तसव्वुर भी न किया होगा। अल्लाह का ख़ज़ाना बे-पायां है और वह जिसे चाहता है बिना हिसाब अता फ़रमाता है।

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