Transliteration: (Fee buyootin azinal laahu an turfa'a wa yuzkara feehasmuhoo yusabbihu lahoo feehaa bilghuduwwi wal aasaal)
"(यह नूर) उन घरों में है [97], जिन्हें बुलन्द करने [98] और जिनमें अपने नाम का ज़िक्र किए जाने का अल्लाह ने हुक्म दिया है; उनमें सुबह और शाम उसकी तस्बीह करते हैं [99]।"
मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि इन घरों से मुराद तमाम मस्जिदें हैं, और ख़ास तौर पर अम्बिया-ए-किराम और अहले-बैत-ए-अतहार के हुजरे हैं। हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि जब हुज़ूर ﷺ से पूछा गया कि क्या हज़रत अली और हज़रत फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) का घर भी इनमें शामिल है? तो हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: 'हाँ, बल्कि यह उन घरों में सबसे अफ़ज़ल है!'
अल्लाह ने मस्जिदों और मुक़द्दस मक़ामात को नापाकी, फुज़ूल बातों और दुनियावी शोर-ओ-ग़ुल से पाक रखने और उनकी ताज़ीम करने का हुक्म दिया है।
इन मुक़द्दस मक़ामात में सुबह (फ़ज्र) और शाम (अस्र व मग़रिब) बा-क़ायदगी से अल्लाह की इबादत, नमाज़ और ज़िक्र-ओ-तस्बीह की जाती है।
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