कुरान - 24:36 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
فِي بُيُوتٍ أَذِنَ ٱللَّهُ أَن تُرۡفَعَ وَيُذۡكَرَ فِيهَا ٱسۡمُهُۥ يُسَبِّحُ لَهُۥ فِيهَا بِٱلۡغُدُوِّ وَٱلۡأٓصَالِ

Transliteration: (Fee buyootin azinal laahu an turfa'a wa yuzkara feehasmuhoo yusabbihu lahoo feehaa bilghuduwwi wal aasaal)

(यह नूर) उन घरों (मस्जिदों) में है [97], जिन्हें बुलन्द करने [98] और जिनमें अपने नाम का ज़िक्र किए जाने का अल्लाह ने हुक्म दिया है; उनमें सुबह और शाम उसकी तस्बीह करते हैं [99]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 36

"(यह नूर) उन घरों में है [97], जिन्हें बुलन्द करने [98] और जिनमें अपने नाम का ज़िक्र किए जाने का अल्लाह ने हुक्म दिया है; उनमें सुबह और शाम उसकी तस्बीह करते हैं [99]।"

[97] 'उन घरों में' (मस्जिदें और बुज़ुर्गों के मकानात)

मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि इन घरों से मुराद तमाम मस्जिदें हैं, और ख़ास तौर पर अम्बिया-ए-किराम और अहले-बैत-ए-अतहार के हुजरे हैं। हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि जब हुज़ूर ﷺ से पूछा गया कि क्या हज़रत अली और हज़रत फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) का घर भी इनमें शामिल है? तो हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: 'हाँ, बल्कि यह उन घरों में सबसे अफ़ज़ल है!'

[98] घरों की ताज़ीम व रफ़अत

अल्लाह ने मस्जिदों और मुक़द्दस मक़ामात को नापाकी, फुज़ूल बातों और दुनियावी शोर-ओ-ग़ुल से पाक रखने और उनकी ताज़ीम करने का हुक्म दिया है।

[99] सुबह व शाम तस्बीह व नमाज़

इन मुक़द्दस मक़ामात में सुबह (फ़ज्र) और शाम (अस्र व मग़रिब) बा-क़ायदगी से अल्लाह की इबादत, नमाज़ और ज़िक्र-ओ-तस्बीह की जाती है।

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