कुरान - 24:34 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَلَقَدۡ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكُمۡ ءَايَٰتٖ مُّبَيِّنَٰتٖ وَمَثَلٗا مِّنَ ٱلَّذِينَ خَلَوۡاْ مِن قَبۡلِكُمۡ وَمَوۡعِظَةٗ لِّلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Wa laqad anzalnaaa ilaikum Aayaatim mubaiyinaatinw wa masalam minal lazeena khalaw min qablikum wa maw'izatal lilmuttaqeen (section 4))

और बेशक हमने तुम्हारी तरफ़ साफ़-साफ़ बयान करने वाली आयतें उतारी हैं [87], और उन लोगों की मिसालें जो तुमसे पहले गुज़र चुके हैं [88], और डरने वालों (मुत्तक़ियों) के लिए एक अज़ीम नसीहत। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 34

"और बेशक हमने तुम्हारी तरफ़ साफ़ बयान करने वाली आयतें उतारी हैं [87], और उन लोगों की मिसालें जो तुमसे पहले गुज़र चुके हैं [88], और डरने वालों के लिए नसीहत।"

[87] वाज़ेह अहकाम

क़ुरआन-ए-पाक ने हलालो-हराम, हुदूद और अख़लाक़ियात के अहकाम को बिल्कुल साफ़ और रौशन अंदाज़ में बयान फ़रमा दिया ताकि किसी को कोई शुबहा न रहे।

[88] पिछली क़ौमों के इब्रतनाक वाक़िआत

पिछली उम्मतों के नेक और बद लोगों के हालात बयान किए ताकि इंसान उनकी कामियाबी से सबक़ ले और उनकी नाफ़रमानी व बर्बादी के अंजाम से पनाह मांगे। यह नसीहत अहले-तक़्वा के दिलों पर गहरा असर करती है।

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