कुरान - 24:32 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
وَأَنكِحُواْ ٱلۡأَيَٰمَىٰ مِنكُمۡ وَٱلصَّـٰلِحِينَ مِنۡ عِبَادِكُمۡ وَإِمَآئِكُمۡۚ إِن يَكُونُواْ فُقَرَآءَ يُغۡنِهِمُ ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦۗ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٞ

Transliteration: (Wa ankihul ayaamaa minkum was saaliheena min 'ibaadikum wa imaa'ikum; iny-yakoonoo fuqaraaa'a yughni himul laahu min fadlih; wal laahu Waasi'un 'Aleem)

और तुम में से जो बे-निकाह हों उनका निकाह कर दो [76], और अपने नेक गुलामों [77] और बांदियों का भी [78]; अगर वे ग़रीब व तंगदस्त होंगे तो अल्लाह अपने फ़ज़्ल से उन्हें ग़नी (बे-नियाज़) कर देगा [79]; और अल्लाह बड़ी वुसअत वाला, सब कुछ जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 32

"और तुम में से जो बे-निकाह हों उनका निकाह कर दो [76], और अपने नेक गुलामों [77] और बांदियों का भी [78]; अगर वे ग़रीब होंगे तो अल्लाह अपने फ़ज़्ल से उन्हें ग़नी कर देगा [79]; और अल्लाह बड़ी वुसअत वाला, जानने वाला है।"

[76] बे-निकाहों के निकाह की तरग़ीब

मुआशरे को पाकीज़ा रखने के लिए हुक्म दिया गया कि जो मर्द या औरतें बे-निकाह हों (चाहे कंवारे हों या बेवा/तलाक़शुदा), उनके निकाह का इंतिज़ाम करो। निकाह को आसान बनाना मुआशरे से बुराई के ख़ात्मे का ज़ामिन है।

[77-78] गुलामों और बांदियों के निकाह

इस्लाम ने ग़ुलामों और बांदियों को भी इज़्ज़तदार ख़ानदानी ज़िन्दगी गुज़ारने का हक़ अता फ़रमाया और उनके निकाह की ताकीद फ़रमाई।

[79] ग़ुरबत निकाह में रुकावट नहीं

अल्लाह तआला ने वादा फ़रमाया कि अगर वे ग़रीब होंगे, तो निकाह की बरकत से अल्लाह उन्हें अपने फ़ज़्ल से ग़नी और ख़ुशहाल कर देगा। हदीस में आता है कि निकाह रिज़्क़ में वुसअत और बरकत का सबब बनता है।

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