Transliteration: (Qul lilmu' mineena yaghuuddoo min absaarihim wa yahfazoo furoojahum; zaalika azkaa lahum; innallaaha khabeerum bimaa yasna'oon)
"मोमिन मर्दों से कह दीजिए कि वे अपनी निगाहें नीची रखें [58] और अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करें [59]; यह उनके लिए ज़्यादा पाकीज़गी की बात है [60]; बेशक अल्लाह ख़ूब बाख़बर है।"
मोमिन मर्दों को हुक्म हुआ कि ग़ैर-महरम औरतों और हराम चीज़ों को देखने से अपनी निगाहों की हिफ़ाज़त करें। पहली ग़ैर-इरादी नज़र मुआफ़ है मगर दोबारा घूरना या शहवत से देखना हराम है। नज़र शैतान के तीरों में से एक ज़हरीला तीर है।
ज़िना, बदकारी और ग़ैर-शरई सोहबत से बचना और अपने सतर को ढांक कर रखना हर मोमिन पर लाज़िम है।
निगाह की हिफ़ाज़त दिल को पाक रखती है और गुनाहों के ख़यालात से बचाती है। जो शख़्स अल्लाह के ख़ौफ़ से अपनी निगाह नीची रखता है, अल्लाह तआला उसके दिल में ईमान की मिठास अता फ़रमाता है।
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