Transliteration: (Fa il lam tajidoo feehaaa ahadan falaa tadkhuloohaa hattaa yu'zana lakum wa in qeela lakumurji'oo farji'oo huwa azkaa lakum; wallaahu bimaa ta'maloona 'Aleem)
"फिर अगर तुम उनमें किसी को न पाओ [52], तो भी उनमें दाख़िल न हो जब तक इजाज़त न दी जाए [53]; और अगर तुमसे कहा जाए कि 'वापस लौट जाओ' [54], तो वापस लौट जाओ; यही तुम्हारे लिए ज़्यादा पाकीज़ा तरीक़ा है।"
अगर घर में कोई मौजूद न दिखे, तब भी किसी के ज़ाती मकानात में बिना इजाज़त घुसना हराम है। घर की मिल्कियत और हुरमत का एहतिराम हर हाल में लाज़िम है।
दाख़िला सिर्फ़ उसी सूरत में जायज़ है जब घर का मालिक या ज़िम्मेदार शख़्स बाज़ाब्ता इजाज़त मरहमत फ़रमाए।
अगर घर वाले किसी मजबूरी की वजह से कहें कि इस वक़्त न मिलें और वापस लौट जाएं, तो बुरा माने बग़ैर ख़ुशदिली से लौट जाना चाहिए। यह दिलों के तकब्बुर को मिटाता है और रूहानी पाकीज़गी बख़्शता है।
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