कुरान - 24:28 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
فَإِن لَّمۡ تَجِدُواْ فِيهَآ أَحَدٗا فَلَا تَدۡخُلُوهَا حَتَّىٰ يُؤۡذَنَ لَكُمۡۖ وَإِن قِيلَ لَكُمُ ٱرۡجِعُواْ فَٱرۡجِعُواْۖ هُوَ أَزۡكَىٰ لَكُمۡۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ عَلِيمٞ

Transliteration: (Fa il lam tajidoo feehaaa ahadan falaa tadkhuloohaa hattaa yu'zana lakum wa in qeela lakumurji'oo farji'oo huwa azkaa lakum; wallaahu bimaa ta'maloona 'Aleem)

फिर अगर तुम उनमें किसी को न पाओ [52], तो भी उनमें दाख़िल न हो जब तक कि तुम्हें इजाज़त न दे दी जाए [53]; और अगर तुमसे कहा जाए कि 'वापस लौट जाओ' [54], तो वापस लौट जाओ; यही तुम्हारे लिए ज़्यादा पाकीज़ा तरीक़ा है; और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे ख़ूब जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 28

"फिर अगर तुम उनमें किसी को न पाओ [52], तो भी उनमें दाख़िल न हो जब तक इजाज़त न दी जाए [53]; और अगर तुमसे कहा जाए कि 'वापस लौट जाओ' [54], तो वापस लौट जाओ; यही तुम्हारे लिए ज़्यादा पाकीज़ा तरीक़ा है।"

[52] ख़ाली घर में दाख़िले की मुमानअत

अगर घर में कोई मौजूद न दिखे, तब भी किसी के ज़ाती मकानात में बिना इजाज़त घुसना हराम है। घर की मिल्कियत और हुरमत का एहतिराम हर हाल में लाज़िम है।

[53] मालिक या मुजाज़ शख़्स की इजाज़त

दाख़िला सिर्फ़ उसी सूरत में जायज़ है जब घर का मालिक या ज़िम्मेदार शख़्स बाज़ाब्ता इजाज़त मरहमत फ़रमाए।

[54] वापस लौटने का हुक्म और रूहानी पाकीज़गी

अगर घर वाले किसी मजबूरी की वजह से कहें कि इस वक़्त न मिलें और वापस लौट जाएं, तो बुरा माने बग़ैर ख़ुशदिली से लौट जाना चाहिए। यह दिलों के तकब्बुर को मिटाता है और रूहानी पाकीज़गी बख़्शता है।

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