कुरान - 24:27 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَدۡخُلُواْ بُيُوتًا غَيۡرَ بُيُوتِكُمۡ حَتَّىٰ تَسۡتَأۡنِسُواْ وَتُسَلِّمُواْ عَلَىٰٓ أَهۡلِهَاۚ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٞ لَّكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa tadkhuloo buyootan ghaira buyootikum hatta tastaanisoo wa tusallimoo 'alaa ahlihaa; zaalikum khairul lakum la'allakum tazakkaroon)

ऐ ईमान वालो! अपने घरों के सिवा दूसरे घरों में उस वक़्त तक दाख़िल न हो जब तक कि तुम इजाज़त न ले लो [50] और घर वालों को सलाम न कर लो; यह तुम्हारे लिए बेहतर है ताकि तुम नसीहत हासिल करो [51]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 27

"ऐ ईमान वालो! अपने घरों के सिवा दूसरे घरों में उस वक़्त तक दाख़िल न हो जब तक कि तुम इजाज़त न ले लो [50] और घर वालों को सलाम न कर लो; यह तुम्हारे लिए बेहतर है ताकि तुम नसीहत हासिल करो [51]।"

[50] घरों में दाख़िले के आदाब (इस्तिईनास)

इस्लाम ने घरों की प्राइवेसी (पर्दे व आज़ादी) की हिफ़ाज़त के लिए यह उसूल मुक़र्रर फ़रमाया कि किसी के घर में बिला-इजाज़त दाख़िल न हो। पहले इजाज़त तलब करो और सलाम करो ताकि घर वालों को ख़बर हो जाए और वे किसी बे-पर्दगी या नागवारी से बच सकें।

[51] पाकीज़ा मुआशरे की तामीर

यह तरीक़ा दिलों की पाकीज़गी, आपसी मोहब्बत और मुआशरती अमन के लिए सबसे बेहतर है ताकि तुम इन आदाब को याद रखो और मुआशरे में अख़लाक़ी नज़्म व ज़ब्त क़ाइम रहे।

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