कुरान - 24:25 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
يَوۡمَئِذٖ يُوَفِّيهِمُ ٱللَّهُ دِينَهُمُ ٱلۡحَقَّ وَيَعۡلَمُونَ أَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡحَقُّ ٱلۡمُبِينُ

Transliteration: (Yawma'iziny yuwaf feehimul laahu deenahumul haqqa wa ya'lamoona annal laaha Huwal Haqqul Mubeen)

उस दिन अल्लाह उन्हें उनका सच्चा (हक़ीक़ी) बदला [46] पूरा-पूरा दे देगा, और वे जान लेंगे कि बेशक अल्लाह ही वाज़ेह हक़ (हक़ीक़त) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 25

"उस दिन अल्लाह उन्हें उनका सच्चा बदला [46] पूरा-पूरा दे देगा, और वे जान लेंगे कि बेशक अल्लाह ही वाज़ेह हक़ है।"

[46] कामिल और सच्चा बदला

अरबी में लफ़्ज़ 'दीन' जज़ा व सज़ा के मानी में भी आता है (इसीलिए क़ियामत को यौमुद्दीन कहते हैं)। उस दिन अल्लाह तआला हर मुजरिम को उसके किए का पूरा-पूरा बदला देगा जिसमें ज़र्रा बराबर ज़ुल्म न होगा, और उस दिन हक़ और बातिल का फ़र्क़ पूरी तरह अयां हो जाएगा।

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