Transliteration: (Yawma'iziny yuwaf feehimul laahu deenahumul haqqa wa ya'lamoona annal laaha Huwal Haqqul Mubeen)
"उस दिन अल्लाह उन्हें उनका सच्चा बदला [46] पूरा-पूरा दे देगा, और वे जान लेंगे कि बेशक अल्लाह ही वाज़ेह हक़ है।"
अरबी में लफ़्ज़ 'दीन' जज़ा व सज़ा के मानी में भी आता है (इसीलिए क़ियामत को यौमुद्दीन कहते हैं)। उस दिन अल्लाह तआला हर मुजरिम को उसके किए का पूरा-पूरा बदला देगा जिसमें ज़र्रा बराबर ज़ुल्म न होगा, और उस दिन हक़ और बातिल का फ़र्क़ पूरी तरह अयां हो जाएगा।
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