कुरान - 24:23 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
إِنَّ ٱلَّذِينَ يَرۡمُونَ ٱلۡمُحۡصَنَٰتِ ٱلۡغَٰفِلَٰتِ ٱلۡمُؤۡمِنَٰتِ لُعِنُواْ فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِ وَلَهُمۡ عَذَابٌ عَظِيمٞ

Transliteration: (Innal lazeena yarmoonal muhsanaatil ghaafilaatil mu'minaati lu'inoo fid dunyaa wal Aakhirati wa lahum 'azaabun 'azeem)

बेशक जो लोग बे-ख़बर, पाकदामन मोमिन औरतों पर तोहमत लगाते हैं, उन पर दुनिया और आख़िरत में लानत की गई है; और उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब है [44]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 23

"बेशक जो लोग बे-ख़बर, पाकदामन मोमिन औरतों पर तोहमत लगाते हैं, उन पर दुनिया और आख़िरत में लानत की गई है; और उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब है [44]।"

[44] पाकदामन मोमिन औरतों पर तोहमत की सख़्त तरीन वईद

यह आयत उन लोगों के लिए इंतिहाई सख़्त वईद बयान करती है जो ऐसी पाकदामन औरतों पर तोहमत लगाते हैं जो गुनाह के ख़याल से भी बे-ख़बर और मुकम्मल बा-हया हैं।

ख़ास तौर पर उम्महातुल मोमिनीन और आम तौर पर तमाम पाकदामन मोमिनात पर झूठा इल्ज़ाम लगाना कबीरा गुनाहों में से है, जिस पर दुनिया और आख़िरत में अल्लाह की लानत और जहन्नम का दर्दनाक अज़ाब मुक़द्दर है।

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