Transliteration: (Wallazeena kafarooo a'maaluhum kasaraabim biqee'atiny yahsabuhuz zamaanu maaa'an hattaaa izaa jaaa'ahoo lam yajid hu shai'anw wa wajadal laaha 'indahoo fa waffaahu hisaabah; wallaahu saree'ul hisaab)
"और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके आमाल रेगिस्तान के सराब की तरह हैं [106] जिसे प्यासा पानी समझता है [107]; जब पास पहुंचे [108] तो कुछ न पाए, और अल्लाह को अपने पास पाए जो पूरा हिसाब चुका दे [109]।"
काफ़िर और मुनकिर जो दुनिया में अच्छे काम (ख़ैरात, अस्पताल बनाना, खिदमत-ए-ख़ल्क़) करते हैं, वे समझते हैं कि आख़िरत में इसका बदला मिलेगा। लेकिन ईमान के बग़ैर ये आमाल धूप में चमकती रेत (सराब) की तरह हैं जिसे प्यासा दूर से पानी समझकर दौड़ता है।
मौत के बाद जब वह क़ियामत में पहुंचेगा तो देखेगा कि उसके आमाल की कोई क़ीमत नहीं, और वहाँ अल्लाह की अदालत क़ाइम है जो उसके कुफ़्र और सरकशी का पूरा-पूरा हिसाब चुका कर उसे जहन्नम में डाल देगी।
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