कुरान - 24:44 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
يُقَلِّبُ ٱللَّهُ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبۡرَةٗ لِّأُوْلِي ٱلۡأَبۡصَٰرِ

Transliteration: (Yuqallibul laahul laila wannahaar; inna fee zaalika la'ibratal li ulil absaar)

अल्लाह ही रात और दिन को उलटता-पुलटता (बदलता) है [123]; बेशक इसमें आंखें (बसीरत) रखने वालों के लिए बड़ी इब्रत है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 44

"अल्लाह ही रात और दिन को बदलता है [123]। बेशक इसमें आंखें रखने वालों के लिए बड़ी इब्रत है।"

[123] लैल व नहार का निज़ाम और अहले-बसीरत के लिए इब्रत

रात और दिन का मुसलसल एक-दूसरे के पीछे आना, उनका छोटा-बड़ा होना और मौसमों का तग़य्युर अल्लाह की तदबीर और हिकमत का खुला सबूत है। जो लोग बसीरत और अक़्ल रखते हैं, वे इस निज़ाम को देखकर समझ जाते हैं कि इस कायनात का कोई मुतलक़ हाकिम और मालिक है।

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