Transliteration: (Yuqallibul laahul laila wannahaar; inna fee zaalika la'ibratal li ulil absaar)
"अल्लाह ही रात और दिन को बदलता है [123]। बेशक इसमें आंखें रखने वालों के लिए बड़ी इब्रत है।"
रात और दिन का मुसलसल एक-दूसरे के पीछे आना, उनका छोटा-बड़ा होना और मौसमों का तग़य्युर अल्लाह की तदबीर और हिकमत का खुला सबूत है। जो लोग बसीरत और अक़्ल रखते हैं, वे इस निज़ाम को देखकर समझ जाते हैं कि इस कायनात का कोई मुतलक़ हाकिम और मालिक है।
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