Transliteration: (Laqad anzalnaaa Aayaatim mubaiyinaat; wallaahu yahdee mai yashaaa'u ilaa Siraatim Mustaqeem)
"बेशक हमने साफ़-साफ़ खोल देने वाली आयतें नाज़िल फ़रमा दी हैं; और अल्लाह जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ़ हिदायत अता फ़रमाता है [129]।"
अल्लाह तआला ने हक़ और बातिल को अलग-अलग करने वाली रौशन आयतें नाज़िल फ़रमाई हैं ताकि कोई शक बाक़ी न रहे। लेकिन हिदायत उसी को नसीब होती है जो सच्चे दिल से हक़ का तालिब हो, और अल्लाह अपनी मशिय्यत से उसे सिरात-ए-मुस्तक़ीम पर चलाता है।
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