कुरान - 24:46 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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لَّقَدۡ أَنزَلۡنَآ ءَايَٰتٖ مُّبَيِّنَٰتٖۚ وَٱللَّهُ يَهۡدِي مَن يَشَآءُ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

Transliteration: (Laqad anzalnaaa Aayaatim mubaiyinaat; wallaahu yahdee mai yashaaa'u ilaa Siraatim Mustaqeem)

बेशक हमने साफ़-साफ़ खोल देने वाली आयतें नाज़िल फ़रमा दी हैं; और अल्लाह जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ़ हिदायत अता फ़रमाता है [129]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 46

"बेशक हमने साफ़-साफ़ खोल देने वाली आयतें नाज़िल फ़रमा दी हैं; और अल्लाह जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ़ हिदायत अता फ़रमाता है [129]।"

[129] वाज़ेह अहकाम और हिदायत-ए-इलाही

अल्लाह तआला ने हक़ और बातिल को अलग-अलग करने वाली रौशन आयतें नाज़िल फ़रमाई हैं ताकि कोई शक बाक़ी न रहे। लेकिन हिदायत उसी को नसीब होती है जो सच्चे दिल से हक़ का तालिब हो, और अल्लाह अपनी मशिय्यत से उसे सिरात-ए-मुस्तक़ीम पर चलाता है।

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