कुरान - 24:45 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَٱللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دَآبَّةٖ مِّن مَّآءٖۖ فَمِنۡهُم مَّن يَمۡشِي عَلَىٰ بَطۡنِهِۦ وَمِنۡهُم مَّن يَمۡشِي عَلَىٰ رِجۡلَيۡنِ وَمِنۡهُم مَّن يَمۡشِي عَلَىٰٓ أَرۡبَعٖۚ يَخۡلُقُ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

Transliteration: (Wallaahu khalaqa kulla daaabbatim mim maaa'in faminhum mai yamshee 'alaa batnihee wa minhum mai yamshee 'alaa rijlaine wa minhum mai yamshee 'alaaa arba'; yakhluqul laahu maa yashaaa'; innal laaha 'alaa kulli shai'in Qadeer)

और अल्लाह ही ने हर चलने-फिरने वाले जानदार को पानी से पैदा किया [124]; पस उनमें से कोई तो अपने पेट के बल रेंगता है [125], और कोई उनमें से दो टांगों पर चलता है [126], और कोई उनमें से चार (टांगों) पर चलता है [127]; अल्लाह जो चाहता है पैदा फ़रमाता है [128]; बेशक अल्लाह हर चीज़ पर पूरी तरह क़ादिर है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 45

"और अल्लाह ने हर जानदार को पानी से पैदा किया [124]; कोई पेट के बल रेंगता है [125], कोई दो टांगों पर चलता है [126], और कोई चार पर चलता है [127]; अल्लाह जो चाहे पैदा फ़रमाता है [128]। बेशक अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।"

[124] हयात का बुनियादी माद्दा: पानी

तमाम जानदारों की पैदाइश की असल पानी (नुत्फ़ा व हयात का माद्दा) है, जैसा कि दूसरी जगह फ़रमाया: 'और हमने हर ज़िन्दा चीज़ को पानी से बनाया'।

[125-127] जानदारों की मुख़्तलिफ़ अस्नाफ़

एक ही पानी से पैदा होने के बावजूद उनकी सूरतों और चाल में अज़ीम इख़्तिलाफ़ है:

  • सांप, कीड़े-मकोड़े जो पेट के बल रेंगते हैं [125],

  • इंसान और परिंदे जो दो पैरों पर चलते हैं [126], और

  • चौपाए और मवेशी जो चार टांगों पर चलते हैं [127]।

[128] कुदरत-ए-इलाही की वुसअत

अल्लाह जो चाहता है अपनी क़ुदरत से ख़ल्क़ फ़रमाता है। यह तनव्वो (विविधता) साबित करता है कि यह काम किसी बे-जान तबीअत का नहीं बल्कि एक हकीम व क़ादिर ख़ालिक़ की कारीगरी है।

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