Transliteration: (Wallaahu khalaqa kulla daaabbatim mim maaa'in faminhum mai yamshee 'alaa batnihee wa minhum mai yamshee 'alaa rijlaine wa minhum mai yamshee 'alaaa arba'; yakhluqul laahu maa yashaaa'; innal laaha 'alaa kulli shai'in Qadeer)
"और अल्लाह ने हर जानदार को पानी से पैदा किया [124]; कोई पेट के बल रेंगता है [125], कोई दो टांगों पर चलता है [126], और कोई चार पर चलता है [127]; अल्लाह जो चाहे पैदा फ़रमाता है [128]। बेशक अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।"
तमाम जानदारों की पैदाइश की असल पानी (नुत्फ़ा व हयात का माद्दा) है, जैसा कि दूसरी जगह फ़रमाया: 'और हमने हर ज़िन्दा चीज़ को पानी से बनाया'।
एक ही पानी से पैदा होने के बावजूद उनकी सूरतों और चाल में अज़ीम इख़्तिलाफ़ है:
सांप, कीड़े-मकोड़े जो पेट के बल रेंगते हैं [125],
इंसान और परिंदे जो दो पैरों पर चलते हैं [126], और
चौपाए और मवेशी जो चार टांगों पर चलते हैं [127]।
अल्लाह जो चाहता है अपनी क़ुदरत से ख़ल्क़ फ़रमाता है। यह तनव्वो (विविधता) साबित करता है कि यह काम किसी बे-जान तबीअत का नहीं बल्कि एक हकीम व क़ादिर ख़ालिक़ की कारीगरी है।
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