कुरान - 13:10 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
سَوَآءٞ مِّنكُم مَّنۡ أَسَرَّ ٱلۡقَوۡلَ وَمَن جَهَرَ بِهِۦ وَمَنۡ هُوَ مُسۡتَخۡفِۭ بِٱلَّيۡلِ وَسَارِبُۢ بِٱلنَّهَارِ

Transliteration: (Sawaaa'um minkum man asarral qawla wa man jahara bihee wa man huwa mustakhfim billaili wa saaribum binnahaar)

(अल्लाह के लिए) बराबर है चाहे तुम में से कोई अपनी बात छिपाकर कहे या उसे ज़ोर से कहे, और जो रात के अंधेरे में छिपा रहे या दिन के उजाले में चले-फिरे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 10 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दिल के भेदों और अंधेरों की ख़बर

अल्लाह के सामने रात का सन्नाटा और दिन का उजाला एक समान हैं। चाहे कोई चुपके से फुसफुसाए या खुलेआम भाषण दे, अल्लाह दिलों के इरादों और चालों से हर पल वाक़िफ़ है।

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