कुरान - 13:1 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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الٓمٓرۚ تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱلۡكِتَٰبِۗ وَٱلَّذِيٓ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ ٱلۡحَقُّ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Alif-Laaam-Meeem-Raa; tilka Aayaatul Kitaab; wallazee unzila ilaika mir Rabbikal haqqu wa laakinna aksaran naasi laa yu'minoon)

अलिफ़-लाम-मीम-रा। ये (क़ुरआन) इस किताब की आयतें हैं; और जो कुछ आपके रब की ओर से आप पर नाज़िल किया गया है वह बिल्कुल सत्य (हक़) है, परन्तु अधिकांश लोग ईमान नहीं लाते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 1 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत और क़ुरआन की हक़्क़ानियत

'अलिफ़-लाम-मीम-रा' हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत में से हैं जिनका वास्तविक ज्ञान केवल अल्लाह के पास है। इसके तुरंत बाद क़ुरआन-ए-मजीद की सत्यता का ऐलान किया गया कि यह वही किताब है जो संपूर्ण सत्य है और अल्लाह की ओर से अवतरित हुई है।

✅ [2] लोगों की हठधर्मी

स्पष्ट प्रमाणों के बावजूद अधिकांश लोग अपने पूर्वाग्रहों, घमंड और अज्ञानता के कारण ईमान स्वीकार नहीं करते।

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