कुरान - 13:3 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
وَهُوَ ٱلَّذِي مَدَّ ٱلۡأَرۡضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَٰسِيَ وَأَنۡهَٰرٗاۖ وَمِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ جَعَلَ فِيهَا زَوۡجَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِۖ يُغۡشِي ٱلَّيۡلَ ٱلنَّهَارَۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ

Transliteration: (Wa Huwal lazee maddal arda wa ja'ala feehaa rawaasiya wa anhaaraa; wa min kullis samaraati ja'ala feehaa zawjain ithnayn; Yughshil lailan nahaar; inna fee zaalika la aayaatil liqawminy yatafakkaroon)

और वही है जिसने धरती को फैलाया और उसमें अटल पहाड़ और नदियां बनाईं; और उसने उसमें प्रत्येक फल के दो-दो जोड़े (प्रकार) बनाए। वह रात से दिन को ढांक देता है। निस्संदेह इसमें उन लोगों के लिए बड़ी निशानियां हैं जो चिंतन-मनन करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 3 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] धरती, पहाड़, नदियां और वनस्पति में तौहीद

धरती का इंसानों के रहने योग्य फैलाव, ज़मीन का संतुलन बनाए रखने के लिए भारी पहाड़, पानी की जीवनदायिनी नदियां और हर फल में नर-मादा (जोड़े) का वैज्ञानिक संतुलन अल्लाह की अद्भुत रचनात्मक शक्ति की गवाही देते हैं।

✅ [2] रात और दिन का चक्र

दिन का उजाला काम के लिए और रात का अंधेरा विश्राम के लिए बनाया गया, जो ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने वालों को तौहीद की तरफ़ बुलाता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now