कुरान - 13:5 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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۞وَإِن تَعۡجَبۡ فَعَجَبٞ قَوۡلُهُمۡ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًا أَءِنَّا لَفِي خَلۡقٖ جَدِيدٍۗ أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡۖ وَأُوْلَـٰٓئِكَ ٱلۡأَغۡلَٰلُ فِيٓ أَعۡنَاقِهِمۡۖ وَأُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Wa in ta'jab fa'ajabun qawluhum 'a-izaa kunna turaaban 'a-inna lafee khalqin jadeed; ulaaa 'ikal lazeena kafaroo bi Rabbihim wa ulaaa'ikal aghlaalu feee a'naaqihim wa ulaaa'ika Ashaabun Naari hum feehaa khaalidoon)

और यदि आप आश्चर्य करें, तो वास्तव में उनका यह कहना बड़ा ही आश्चर्यजनक है कि, "क्या जब हम (मरकर) मिट्टी हो जाएंगे, तो क्या हम वास्तव में एक नई सृष्टि में दोबारा जीवित किए जाएंगे?" यही वे लोग हैं जिन्होंने अपने रब के साथ कुफ़्र (इनकार) किया, और यही वे लोग हैं जिनके गलों में तौक़ (बेड़ियां) होंगी, और यही आग (जहन्नम) वाले हैं, वे उसमें सदैव रहेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 5 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] पुनर्जन्म का इनकार अक़्ल के ख़िलाफ़

मुश्रिकों का यह सोचना कि मिट्टी बनने के बाद दोबारा कैसे उठाया जाएगा, अक़्ल के बिल्कुल ख़िलाफ़ है। जिस अल्लाह ने पहली बार शून्य से इतनी अज़ीम कायनात पैदा की, उसके लिए दोबारा पैदा करना तो कहीं अधिक आसान है।

✅ [2] आख़िरत में गलों की ज़ंजीरें

कुफ़्र और इनकार के बदले में क़यामत के दिन उनके गलों में लोहे के तौक़ डाले जाएंगे और वे हमेशा के लिए दोज़ख़ में रहेंगे।

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