कुरान - 13:43 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَسۡتَ مُرۡسَلٗاۚ قُلۡ كَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدَۢا بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡ وَمَنۡ عِندَهُۥ عِلۡمُ ٱلۡكِتَٰبِ

Transliteration: (Wa yaqoolul lazeena kafaroo lasta mursalaa; qul kafaa billaahi shaheedam bainee wa bainakum wa man 'indahoo 'ilmul Kitaab)

और जो लोग इनकार करते हैं वे कहते हैं, "आप कोई रसूल नहीं हैं।" कह दीजिए, "मेरे और तुम्हारे बीच गवाह के रूप में अल्लाह काफ़ी है और वह व्यक्ति भी जिसके पास (आसमानी) किताब का सच्चा ज्ञान है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 43 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह और आसमानी किताबों के आलिमों की गवाही

काफ़िरों के इनकार के जवाब में रसूलुल्लाह ﷺ को फ़रमाया गया कि कह दो: 'मेरी रिसालत पर सबसे बड़ी गवाही स्वयं अल्लाह की है जिसने यह बेमिसाल क़ुरआन मुझ पर उतारा, और पिछली किताबों के वे सच्चे आलिम भी गवाह हैं जो जानते हैं कि मेरी नुबुव्वत की भविष्यवाणियां तौरात और इंजील में पहले से मौजूद हैं।'

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now