कुरान - 13:41 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا نَأۡتِي ٱلۡأَرۡضَ نَنقُصُهَا مِنۡ أَطۡرَافِهَاۚ وَٱللَّهُ يَحۡكُمُ لَا مُعَقِّبَ لِحُكۡمِهِۦۚ وَهُوَ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ

Transliteration: (Awalam yaraw annaa na'til arda nanqusuhaa min atraafihaa; wallaahu yahkumu laa mu'aqqiba lihukmih; wa Huwa saree'ul hisaab)

क्या वे नहीं देखते कि हम इस भूमि (कुफ़्र के इलाक़ों) पर आ रहे हैं, उसके किनारों से उसे घटाते चले जा रहे हैं? और अल्लाह ही फ़ैसला करता है, उसके आदेश को कोई टालने वाला नहीं; और वह बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 41 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] इस्लाम की विजय और कुफ़्र का सिमटना

अल्लाह तआला मुश्रिकों को सचेत करता है कि देखो कैसे इस्लाम की दावत चारों ओर फैल रही है और कुफ़्र का दायरा हर कोने से सिकुड़ता जा रहा है। अल्लाह के फ़ैसले को दुनिया की कोई ताक़त बदल नहीं सकती।

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