कुरान - 13:39 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
يَمۡحُواْ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ وَيُثۡبِتُۖ وَعِندَهُۥٓ أُمُّ ٱلۡكِتَٰبِ

Transliteration: (Yamhul laahu maa yashaaa'u wa yusbitu wa 'indahooo ummul Kitaab)

अल्लाह जो चाहता है मिटा देता है और जिसे चाहता है क़ायम रखता है; और उसी के पास मूल किताब (उम्मुल किताब/लौह-ए-महफ़ूज़) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 39 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] मह्व-ओ-इस्बात और उम्मुल किताब

अल्लाह शरीअत के अहकाम में नासिख़ व मंसूख़ (परिवर्तन) फ़रमाता है और बंदों के फ़रिश्तों के रजिस्टरों में दुआ और नेकी के ज़रिए बलाओं को टालता है। परन्तु मूल तक़दीर 'लौह-ए-महफ़ूज़' (उम्मुल किताब) में सुरक्षित है जो कभी बदलती नहीं।

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