कुरान - 13:38 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا رُسُلٗا مِّن قَبۡلِكَ وَجَعَلۡنَا لَهُمۡ أَزۡوَٰجٗا وَذُرِّيَّةٗۚ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأۡتِيَ بِـَٔايَةٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۗ لِكُلِّ أَجَلٖ كِتَابٞ

Transliteration: (Wa laqad arsalnaa Rusulam min qablika wa ja'alnaa lahum azwaajanw wa zurriyyah; wa maa kaana lirasoolin ai ya'tiya bi aayatin illaa bi iznil laah; likulli ajalin kitaab)

और निश्चय ही हमने आपसे पहले भी बहुत-से रसूल भेजे और हमने उन्हें पत्नियां और संतान भी दीं। और किसी रसूल का यह काम न था कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना कोई निशानी (चमत्कार) ले आए। प्रत्येक अवधि (समय) के लिए एक लिखित विधान (तक़दीर) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 38 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] पैग़म्बरों का पारिवारिक और मानवीय जीवन

काफ़िर ऐतराज़ करते थे कि नबी निकाह क्यों करते हैं और बाल-बच्चे क्यों रखते हैं? अल्लाह ने साफ़ फ़रमाया कि सभी पिछले नबी भी पारिवारिक जीवन जीते थे और इंसान थे। चमत्कार लाना भी नबी की मर्ज़ी नहीं, केवल अल्लाह के हुक्म से होता है।

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