कुरान - 13:37 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
وَكَذَٰلِكَ أَنزَلۡنَٰهُ حُكۡمًا عَرَبِيّٗاۚ وَلَئِنِ ٱتَّبَعۡتَ أَهۡوَآءَهُم بَعۡدَمَا جَآءَكَ مِنَ ٱلۡعِلۡمِ مَا لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا وَاقٖ

Transliteration: (Wa kazaalika anzalnaahu hukman 'Arabiyyaa; wa la'init taba'ta ahwaaa 'ahum ba'da maa jaaa'aka minal 'ilmi maa laka minal laahi minw waliyinw wa laa waaq)

और इसी प्रकार हमने इस (क़ुरआन) को एक अरबी निर्णय (आदेश-पत्र) बनाकर उतारा है। और यदि आप उस ज्ञान के बाद जो आपके पास आ चुका है, उनकी इच्छाओं का अनुसरण करेंगे, तो अल्लाह के मुक़ाबले में न आपका कोई समर्थक होगा और न कोई बचाने वाला। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 37 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हुकमन अरबिय्या और मनमर्ज़ी से परहेज़

क़ुरआन स्पष्ट अरबी भाषा में जीवन के फ़ैसलों का ईश्वरीय विधान है। इसमें उम्मत को सख़्त ताकीद है कि हक़ और शरीअत आ जाने के बाद ग़ैर-मुस्लिमों या अज्ञानियों की ख़्वाहिशात के पीछे हरगिज़ न चला जाए।

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