कुरान - 13:36 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ يَفۡرَحُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَۖ وَمِنَ ٱلۡأَحۡزَابِ مَن يُنكِرُ بَعۡضَهُۥۚ قُلۡ إِنَّمَآ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ ٱللَّهَ وَلَآ أُشۡرِكَ بِهِۦٓۚ إِلَيۡهِ أَدۡعُواْ وَإِلَيۡهِ مَـَٔابِ

Transliteration: (Wallazeena aatainaa humul Kitaaba yafrahoona bimaa unzila ilaika wa minal Ahzaabi mai yunkiru ba'dah; qul innamaa umirtu an a'budal laaha wa laaa ushrika bih; ilaihi ad'oo wa ilaihi maab)

और वे लोग जिन्हें हमने (पहले) किताब दी थी, वे उस (क़ुरआन) से प्रसन्न होते हैं जो आपकी ओर नाज़िल किया गया है; और विभिन्न दलों में कुछ ऐसे भी हैं जो इसके कुछ भाग का इनकार करते हैं। कह दीजिए, "मुझे तो बस यही आदेश दिया गया है कि मैं अल्लाह की इबादत करूँ और उसके साथ किसी को साझीदार न ठहराऊं। मैं उसी की ओर बुलाता हूँ और उसी की ओर मेरा लौटना है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 36 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अहले-किताब के सच्चे विद्वानों का ईमान

तौरात और इंजील के ईमानदार विद्वान (जैसे हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम) क़ुरआन को देखकर ख़ुश हुए क्योंकि यह उनकी किताबों की भविष्यवाणियों के अनुरूप था। परन्तु कुछ हठधर्मी दलों ने ईर्ष्यावश इसका इनकार किया।

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