कुरान - 13:34 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
لَّهُمۡ عَذَابٞ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَعَذَابُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَشَقُّۖ وَمَا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن وَاقٖ

Transliteration: (Lahum 'azaabun fil hayaatid dunyaa wa la'azaabul Aakhirati ashaq, wa maa lahum minal laahi min-waaq)

उनके लिए सांसारिक जीवन में भी यातना (सज़ा) है, और आख़िरत का अज़ाब तो कहीं अधिक कठोर है; और उन्हें अल्लाह (की पकड़) से बचाने वाला कोई नहीं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 34 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दोनों जहान में अज़ाब

हठधर्मी काफ़िरों को दुनिया में ज़िल्लत, युद्धों में क़त्ल और बदहाली का सामना करना पड़ता है, और आख़िरत की आग इससे कहीं अधिक भयंकर और शाश्वत होगी जहाँ कोई सिफ़ारिश या बचाव नहीं होगा।

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