कुरान - 13:33 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
أَفَمَنۡ هُوَ قَآئِمٌ عَلَىٰ كُلِّ نَفۡسِۭ بِمَا كَسَبَتۡۗ وَجَعَلُواْ لِلَّهِ شُرَكَآءَ قُلۡ سَمُّوهُمۡۚ أَمۡ تُنَبِّـُٔونَهُۥ بِمَا لَا يَعۡلَمُ فِي ٱلۡأَرۡضِ أَم بِظَٰهِرٖ مِّنَ ٱلۡقَوۡلِۗ بَلۡ زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ مَكۡرُهُمۡ وَصُدُّواْ عَنِ ٱلسَّبِيلِۗ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٖ

Transliteration: (Afaman Huwa qaaa'imun 'alaa kulli nafsim bimaa kasabat; wa ja'aloo lillaahi shurakaaa'a qul samoohum; am tunabbi'oona hoo bimaa laa ya'lamu fil ardi; am bizaahirim minal qawl; bal zuyyina lillazeena kafaroo makruhum wa suddoo 'anis sabeel; wa mai yudlilil laahu famaa lahoo min haad;)

तो क्या वह (अल्लाह) जो प्रत्येक जीव की निगरानी रखता है जो कुछ उसने कमाया है (उन झूठे माबूदों जैसा हो सकता है)? और उन्होंने अल्लाह के साझीदार ठहरा लिए। कहिए, "ज़रा उनके नाम तो बताओ! क्या तुम उसे ऐसी चीज़ की ख़बर देते हो जिसे वह धरती में नहीं जानता, या केवल ऊपरी दिखावे की बात करते हो?" बल्कि काफ़िरों के लिए उनकी चालबाज़ी (और कपट) सुहावनी बना दी गई है और उन्हें सीधे रास्ते से रोक दिया गया है। और जिसे अल्लाह भटका दे उसे कोई मार्ग दिखाने वाला नहीं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 33 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हर जान का निगहबान बनाम बेबस मूर्तियां

अल्लाह हर इंसान के हर आमाल और नीयत पर नज़र रखता है। मुश्रिकों से पूछा गया कि जिन बुतों को तुमने साझीदार बनाया है, क्या कायनात में उनका कोई वजूद या ताक़त है जिसे ख़ुदा भी नहीं जानता? यह केवल मनगढ़ंत नाम और थोथी बातें हैं।

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