कुरान - 13:32 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
وَلَقَدِ ٱسۡتُهۡزِئَ بِرُسُلٖ مِّن قَبۡلِكَ فَأَمۡلَيۡتُ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ ثُمَّ أَخَذۡتُهُمۡۖ فَكَيۡفَ كَانَ عِقَابِ

Transliteration: (Wa laqadis tuhzi'a bi Rusulim min qablika fa amlaitu lillazeena kafaroo summa akhaztuhum fakaifa kaana 'iqaab)

और निश्चय ही आपसे पहले भी रसूलों का उपहास उड़ाया गया, तो मैंने इनकार करने वालों को कुछ समय की ढील दी, फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया; तो कैसी रही मेरी सज़ा? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 32 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] रसूलुल्लाह ﷺ को तसल्ली

इतिहास गवाह है कि हर नबी का मज़ाक उड़ाया गया, मगर अल्लाह की ढील को कमज़ोरी नहीं समझना चाहिए। जब अल्लाह की पकड़ आई तो कोई ज़ालिम बच नहीं सका।

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