कुरान - 13:30 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
كَذَٰلِكَ أَرۡسَلۡنَٰكَ فِيٓ أُمَّةٖ قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِهَآ أُمَمٞ لِّتَتۡلُوَاْ عَلَيۡهِمُ ٱلَّذِيٓ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ وَهُمۡ يَكۡفُرُونَ بِٱلرَّحۡمَٰنِۚ قُلۡ هُوَ رَبِّي لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ عَلَيۡهِ تَوَكَّلۡتُ وَإِلَيۡهِ مَتَابِ

Transliteration: (Kazaalika arsalnaaka feee ummatin qad khalat min qablihaaa umamul litatluwa 'alaihimul lazeee awhainaaa ilaika wa hum yakfuroona bir Rahmaaan; qul Huwa Rabbee laaa ilaaha illaa Huwa 'alaihi tawakkaltu wa ilaihi mataab)

इसी प्रकार हमने आपको एक ऐसी उम्मत में भेजा है जिससे पहले बहुत-सी उम्मतें गुज़र चुकी हैं, ताकि आप उन्हें वह (क़ुरआन) पढ़कर सुनाएं जो हमने आपकी ओर वह्य किया है; और वे परम दयालु (रहमान) के साथ कुफ़्र (इनकार) कर रहे हैं। कह दीजिए, "वही मेरा रब है, उसके सिवा कोई पूज्य (माबूद) नहीं। उसी पर मैंने भरोसा किया और उसी की ओर मेरा लौटना है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 30 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] रसूलुल्लाह ﷺ का पैग़ाम और रहमान का इनकार

मक्का के मुश्रिक अल्लाह के नाम 'अर-रहमान' से चिढ़ते थे। अल्लाह ने नबी ﷺ को हुक्म दिया कि बेखौफ़ होकर ऐलान करें कि मेरा रब वही रहमान है, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, मेरा तवक्कुल उसी पर है और मुझे उसी के हुज़ूर हाज़िर होना है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now