कुरान - 13:28 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَتَطۡمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكۡرِ ٱللَّهِۗ أَلَا بِذِكۡرِ ٱللَّهِ تَطۡمَئِنُّ ٱلۡقُلُوبُ

Transliteration: (Allazeena aamanoo wa tatma'innu quloobuhum bizikril laah; alaa bizikril laahi tatma'innul quloob)

वे लोग जो ईमान लाए और जिनके दिलों को अल्लाह के ज़िक्र (स्मरण) से शांति और संतोष मिलता है। सुन लो! अल्लाह के ज़िक्र ही से दिलों को वास्तविक शांति (इत्मीनान) प्राप्त होती है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 28 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अला बि-ज़िक्रिल्लाहि तत़्मइन्नुल क़ुलूब

यह आयत रूहानी सुकून का सबसे बड़ा नुस्ख़ा है। दुनिया की दौलत, पद और भौतिक सुख कभी दिल को सच्चा चैन नहीं दे सकते। मानव आत्मा का वास्तविक सुकून केवल अपने पैदा करने वाले रब की याद, नमाज़, तिलावत और तस्बीह में ही छिपा है।

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