Transliteration: (Allaahu yabsutur rizqa limai yashaaa'u wa yaqdir; wa farihoo bilhayaatid dunyaa wa mal hayaatud dunya fil Aakhirati illaa mataa')
दुन्यावी दौलत का ज़्यादा होना अल्लाह की रज़ामंदी की दलील नहीं और न ही ग़रीबी अल्लाह की नाराज़गी की निशानी है। अल्लाह अपनी हिकमत से इम्तिहान के तौर पर रोज़ी घटाता और बढ़ाता है।
जो लोग दुनिया की चकाचौंध में खो जाते हैं वे भूल जाते हैं कि दुनियावी ज़िंदगी आख़िरत की तुलना में केवल एक चंद रोज़ा मुसाफ़िरख़ाना और मामूली सामान (मताअ) है।
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