कुरान - 13:26 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
ٱللَّهُ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ وَفَرِحُواْ بِٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَمَا ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا فِي ٱلۡأٓخِرَةِ إِلَّا مَتَٰعٞ

Transliteration: (Allaahu yabsutur rizqa limai yashaaa'u wa yaqdir; wa farihoo bilhayaatid dunyaa wa mal hayaatud dunya fil Aakhirati illaa mataa')

अल्लाह जिसके लिए चाहता है रोज़ी (आजीविका) को विस्तृत कर देता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है। और वे सांसारिक जीवन पर मग्न (प्रसन्न) हो गए, जबकि सांसारिक जीवन तो आख़िरत के मुक़ाबले में केवल एक तुच्छ सा लाभ (सामग्री) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 26 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] रोज़ी की कमी-बेशी अल्लाह की हिकमत पर है

दुन्यावी दौलत का ज़्यादा होना अल्लाह की रज़ामंदी की दलील नहीं और न ही ग़रीबी अल्लाह की नाराज़गी की निशानी है। अल्लाह अपनी हिकमत से इम्तिहान के तौर पर रोज़ी घटाता और बढ़ाता है।

✅ [2] दुनिया की हक़ीक़त आख़िरत के सामने तुच्छ है

जो लोग दुनिया की चकाचौंध में खो जाते हैं वे भूल जाते हैं कि दुनियावी ज़िंदगी आख़िरत की तुलना में केवल एक चंद रोज़ा मुसाफ़िरख़ाना और मामूली सामान (मताअ) है।

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