कुरान - 13:25 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
وَٱلَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهۡدَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مِيثَٰقِهِۦ وَيَقۡطَعُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ أُوْلَـٰٓئِكَ لَهُمُ ٱللَّعۡنَةُ وَلَهُمۡ سُوٓءُ ٱلدَّارِ

Transliteration: (Wallazeena yanqudoona 'Ahdal laahi mim ba'di meesaaqihee wa yaqta'oona maaa amaral laahu biheee ai yoosala wa yufsidoona fil ardi ulaaa'ika lahumul la'natu wa lahum sooo'ud daar)

और जो लोग अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे पक्का करने के बाद तोड़ डालते हैं, और उन संबंधों को काटते हैं जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है, और धरती में फ़साद (उपद्रव) फैलाते हैं—यही वे लोग हैं जिन पर लानत (धिक्कार) है और उनके लिए बहुत बुरा ठिकाना है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 25 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] बदकारों के 3 बड़े अपराध

1. अल्लाह से किए गए वादों और इंसानी समझौतों को तोड़ना;
2. क़ता-ए-रहमी करना (रिश्ते-नाते और इंसानियत के ताल्लुक़ात को तोड़ना);
3. ज़मीन में ज़ुल्म, गुनाह और फ़साद फैलाना।

✅ [2] लानत और बुरा अंजाम

ऐसे नाफ़रमान अल्लाह की रहमत से महरूम (लानत के हक़दार) हैं और आख़िरत में जहन्नम की दर्दनाक सज़ा उनके इंतज़ार में है।

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